नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीर स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि ओवरस्पीडिंग के कारण हर साल करीब 1,20,000 मौतें होती हैं, जबकि हेलमेट न पहनने से 54,000 से अधिक और सीट बेल्ट न लगाने से 14,000 से ज्यादा लोगों की जान जाती है।
मंत्री ने ‘इंडियन रोड्स@2030: रेजिंग द बार ऑफ सेफ्टी’ नामक तीसरे राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सम्मेलन में यह आंकड़े साझा किए। गडकरी ने कहा कि देश में हर साल लगभग 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें कुल 1.80 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से 72 प्रतिशत मौतें 18 से 45 वर्ष की आयु के युवाओं की होती हैं, जिससे युवा पीढ़ी की भारी क्षति हो रही है।
बच्चों पर प्रभाव नितिन गडकरी ने विशेष रूप से चिंता जताई कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की 10,000 से अधिक मौतें हर साल सड़क हादसों में होती हैं। उन्होंने कहा कि नशे में गाड़ी चलाना, गलत साइड से वाहन चलाना और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए ड्राइविंग करना भी मौत के प्रमुख कारण बने हुए हैं।
सरकार की चिंता और प्रयास मंत्री ने जोर देकर कहा कि सड़क दुर्घटनाओं से देश की GDP का 3 प्रतिशत नुकसान हो रहा है। उन्होंने व्यवहार परिवर्तन (behaviour change) पर जोर दिया और कहा कि सड़क इंजीनियरिंग, वाहन सुरक्षा और सख्त प्रवर्तन के साथ-साथ लोगों की जागरूकता और अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार ग्रेड-आधारित ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम पर विचार कर रही है, ताकि जिम्मेदार ड्राइविंग को प्रोत्साहन मिले।
यह आंकड़े हाल के वर्षों के आधिकारिक आंकड़ों (MoRTH रिपोर्ट) पर आधारित हैं, जो दर्शाते हैं कि मानवीय लापरवाही सड़क सुरक्षा के सबसे बड़े खतरे बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हेलमेट, सीट बेल्ट और स्पीड लिमिट का पालन करके बड़ी संख्या में जानें बचाई जा सकती हैं।















