देहरादून: उत्तराखंड के सत्ता पक्ष के एक विधायक ने अपने परिवारजनों पर लगे मुकदमों और आरोपों के खिलाफ स्पष्टता लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के विधायकों या उनके परिवार पर कोई भी आरोप लगने पर उन्हें खुद ही जांच में सक्रिय सहयोग करना चाहिए और पारदर्शिता बरतनी चाहिए।
इसी क्रम में, विधायक प्रदीप रावत ने आज देहरादून में उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने परिवार पर दर्ज मुकदमों की कड़ी और निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही, उन्होंने यह प्रस्ताव रखा कि मामले से जुड़े तीनों पक्षों—जिन पर मुकदमा दर्ज है, जिन्होंने मुकदमा लिखवाया है और जो गवाह हैं—का पॉलीग्राफ परीक्षण (लाइ डिटेक्टर टेस्ट) कराया जाए।
विधायक ने कहा, “इससे स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सही है और कौन गलत। जो भी पक्ष गलत साबित होगा, उसे उचित सजा मिलनी चाहिए और जो निर्दोष है, उसे पूरी तरह दोषमुक्त किया जाना चाहिए।” उन्होंने जोर दिया कि ऐसी वैज्ञानिक जांच से सच्चाई सामने आएगी और अनावश्यक विवादों का अंत होगा।
यह कदम सत्ता पक्ष के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही की मिसाल पेश करने की दिशा में देखा जा रहा है। डीजीपी ने विधायक की मांग पर विचार करने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
जानकारों के अनुसार, पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग को अदालत की अनुमति से ही अमल में लाया जा सकता है, और यह जांच प्रक्रिया को मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।















