मिडिल ईस्ट संकट से दहला बाजार, 1072 अंक गिरा सेंसेक्स, निवेशकों के 8 लाख करोड़ डूबे

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भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को जोरदार बिकवाली देखी गई, जिसके पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव मुख्य कारण रहे। अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर हुए हमलों के बाद क्षेत्र में युद्ध की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा।

सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट प्री-ओपन सेशन में सेंसेक्स 2,743 अंक तक गिरकर 78,543 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 533 अंक लुढ़ककर 24,645 पर आ गया। बाजार खुलते ही सेंसेक्स 1,000 से 1,100 अंकों की गिरावट के साथ 80,200-80,300 के आसपास कारोबार कर रहा था, जो पिछले सत्र के बंद भाव से करीब 1.3% नीचे था। निफ्टी भी 300-350 अंकों की गिरावट के साथ 24,800-24,900 के दायरे में ट्रेड कर रहा था।

निवेशकों की संपत्ति में भारी नुकसान इस तेज गिरावट से बीएसई सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सत्र के ₹463.50 लाख करोड़ से घटकर शुरुआती मिनटों में ₹455 लाख करोड़ के करीब पहुंच गया। इससे निवेशकों की संपत्ति में ₹8 लाख करोड़ से अधिक की कमी आई।

रुपया और सुरक्षित निवेशों में उछाल रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 24 पैसे कमजोर होकर 91.32 पर पहुंच गया। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूर होकर सुरक्षित निवेशों की ओर मुड़े। सोने की कीमतें 3% बढ़कर ₹1,67,329 प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) और चांदी ₹2,85,700 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गईं।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ब्रेंट क्रूड की कीमतें 7-10% उछलकर $82.37 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 7% से अधिक बढ़कर $71.86 पर ट्रेड कर रहा था। होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित बाधा के डर से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने कीमतों को हवा दी।

एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी दबाव एशियाई बाजारों में व्यापक गिरावट देखी गई—निक्केई 1.55%, स्ट्रेट्स टाइम्स 1.86%, हैंग सेंग 2% से अधिक और ताइवान का इंडेक्स 0.33% नीचे रहा। अमेरिकी बाजारों में भी डॉव जोन्स फ्यूचर्स 0.77% गिरे, जबकि शुक्रवार को एसएंडपी 500 और नैस्डैक में क्रमशः 0.43% और 0.94% की गिरावट आई।

विशेषज्ञों की राय मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक स्थिरता की तलाश में हैं। ईरान के विदेश मंत्री के बयान से कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद नहीं होगा और नया नेतृत्व अमेरिका से वार्ता चाहता है, से कुछ रिकवरी दिखी, लेकिन तनाव बरकरार है। उन्होंने ईरान-अमेरिका तनाव के भारत पर तीन प्रमुख प्रभाव बताए:

  1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल — इससे महंगाई, चालू खाता घाटा और कॉरपोरेट लागत बढ़ सकती है।
  2. खाड़ी क्षेत्र के व्यापारिक साझेदारों पर असर — शिपिंग रूट बाधित होने से निर्यात प्रभावित हो सकता है।
  3. 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा — क्षेत्र में तनाव बढ़ने से रेमिटेंस और अर्थव्यवस्था पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।

बाजार में रिस्क-ऑफ माहौल बना हुआ है, और निवेशक सोने, डॉलर जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति स्थिर होने तक अस्थिरता बनी रह सकती है।

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