देहरादून: जिला विकास प्राधिकरण कोटद्वार में माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है, लिहाजा चाही गई सूचनाओं में हेर फेर की जा रही है व अवैध निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए विभागीय रजिस्टर और पत्रावलियों का अवलोकन नहीं कराया जा रहा है।
सूचनार्थी मुजीब नैथानी द्वारा अवैध निर्माण की विभागीय पत्रावलियों की सूचना चाही गई थी, मगर लोक सूचना अधिकारी ने उक्त पत्रावलियों को सूचना का अधिकार की धारा 8 की आड़ में उक्त निजी सूचना बताते हुए सूचना देने से इंकार किया गया।
पूर्व में हुई सुनवाई में सूचना आयुक्त अर्जुन सिंह द्वारा मामले में धारा 8 के संबंध में अवगत कराया गया कि पत्रावलियां विभागीय हैं और विभागीय पत्रावलियों में किसी का नाम काम का उल्लेख उसे सूचना का अधिकार में देय नहीं है, नहीं बनाता।
सूचना आयुक्त द्वारा लोक सूचना अधिकारी से पूछा गया कि उक्त पत्रावलियों को संसद और विधानसभा में तलब कर लिया जाय तो क्या ये पत्रावलियाँ संसद और विधानसभा में नहीं दिखाई जायेंगी, इस पर लोक सूचना अधिकारी ने कहा कि दिखाई जायेंगी। इस पर सूचना आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जो पत्रावलियां संसद और विधान मंडल में प्रेषित की जा सकती हैं, उन पत्रावलियों में धारित सूचना को आम नागरिक को देखने लेने से नहीं रोका जा सकता है।
सूचना देने में इस तरह रुकावट डाले जाने पर लोक सूचना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था, जिस पर लोक सूचना अधिकारी के प्रतिनिधि के द्वारा अवैध निर्माण से संबंधित पत्रावलियों का अवलोकन करा देने की बात कही मगर दो साल तक अवलोकन नहीं कराया गया।
अब सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर ने मामले में कई आदेशों के बावजूद सूचना न दिये जाने पर पूर्व लोक सूचना अधिकारी सोहन सिंह सैनी पर रूपये बीस हजार, प्रमोद कुमार पर रूपये एक हजार व शालिनी मौर्य पर रूपये एक हजार का जुर्माना लगाया है।














