अमेरिका के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑन ड्रग एब्यूज़ ने ई-सिगरेट के बारे में किया बड़ा दावा

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ई-सिगरेट आज युवाओं में जिस तरह से एक फैशन की तरह बढ़ता जा रहा है, उसकी वजह से यह एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले लेगा। क्योंकि ई-सिगरेट प्रयोग करने वाले किशोरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता रिचर्ड मीच ने कहा, “स्कूल में जाने वाले बच्चों के माता-पिता को इन उपकरणों पर ध्यान देना शुरू करना चाहिए, जो साधारण फ्लैश ड्राइव की तरह दिखते हैं.

यह उन फ्लेवर्स के साथ आते हैं, जो युवाओं को पसंद आ रहे हैं। शोधकर्ता मीच का कहना है, कि किशोर इन उत्पादों का उपयोग ना कर सकें, इसके लिए राष्ट्रीय नेता, नीतियों व कार्यक्रम को लागू करके माता-पिता की सहायता कर सकते हैं। अमेरिका में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑन ड्रग एब्यूज़ से जुड़े नोरा डी वोल्कोव ने किशोरों में बढ़ते ई-सिगरेट के चलन पर चिंता जताते हुए कहा, कि अब ये एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुकी है।

एक अध्ययन के अनुसार, 2019 में बारहवीं कक्षा के चार में से 1 छात्र ने ई-सिगरेट का प्रयोग किया। इसके अलावा दसवीं कक्षा के पांच में से एक छात्र ने और आठवीं कक्षा के ग्यारह में से एक छात्र ने ई सिगरेट का प्रयोग किया। अमेरिका में ई-सिगरेट का प्रयोग किशोरों में दुगनी रफ़्तार से बढ़ रहा है। ई-सिगरेट का प्रयोग युवाओं में साँस, हृदय, और फेफड़े संबंधी बीमारियों की वजह बन रही है। भारत में तो इसे पूरी तरह बैन कर दिया गया है।