गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रधानमंत्री मोदी ने सिडनी डायलॉग को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने क्रिप्टोकरेंसी पर अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी जैसे तकनीकी नवाचारों का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “सभी देशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि क्रिप्टो गलत हाथों में न पड़े। क्रिप्टोकरेंसी या बिटकॉइन का उदाहरण ले लीजिए। यह बहुत जरूरी है कि सभी लोकतांत्रिक देश इसपर काम करें और यह सुनिश्चित करें कि यह गलत हाथों में न पड़े, क्योंकि इससे हमारे युवा पर गलत असर पड़ेगा।”
उन्होंने आगे कहा कि “हम एक युग में होने वाले ऐसे बदलाव के दौर में हैं, जब तकनीक और डेटा हमारे नए हथियार बन रहे हैं।” बता दें कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर जोर-शोर से विचार-विमर्श चल रहा है। एक तरफ जहां आरबीआई गवर्नर ने इसे एक बड़ा खतरा करार दिया है, तो दूसरी ओर हाल ही में संसदीय पैनल की बैठक के दौरान कहा चर्चा में कहा गया कि क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है और अगला कदम इसे विनियमित करने के तरीके खोजने का होना चाहिए।

पिछले हफ्ते पीएम मोदी की अध्यक्षता में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर बैठक हुई थी। इस बैठक में भी कई जरूरी बातें हुई थीं और कई मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी। बैठक के बाद सूत्रों का कहना था कि “सरकार इस तथ्य से अवगत है कि यह एक विकसित तकनीक है, इसलिए इसपर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और इसपर सक्रिय कदम उठाए जाएंगे। इस बात पर भी सहमति थी कि सरकार द्वारा इस क्षेत्र में उठाए गए कदम प्रगतिशील और दूरदर्शी होंगे।”















