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चारधाम यात्रा 2026: बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के बीच ‘डेंजर जोन’ बने बड़ी चुनौती

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देहरादून: चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत इस महीने 19 अप्रैल से होने जा रही है। हर साल बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के बीच इस बार यात्रा मार्ग पर मौजूद ‘डेंजर जोन’ सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं।

लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या

चारधाम यात्रा में आस्था का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में करीब 50 लाख श्रद्धालुओं ने यात्रा की, जबकि 2024 में यह आंकड़ा लगभग 46 लाख था। इस साल भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

यात्रा मार्ग पर बढ़े खतरे

  • उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, यात्रा मार्ग पर भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के खतरे तेजी से बढ़े हैं।
  • 2025 में 53 बड़े लैंडस्लाइड जोन चिन्हित किए गए थे।
  • 2026 में ऐसे खतरनाक क्षेत्रों की संख्या बढ़कर लगभग 100 हो गई है।

इनमें से करीब 80 स्थानों पर सुधार और सुरक्षा कार्य शुरू कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने इन कार्यों के लिए 700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है।

सबसे ज्यादा संवेदनशील मार्ग

चारोंधामों में अलग-अलग स्थानों पर खतरे मौजूद हैं, लेकिन यमुनोत्री और केदारनाथ मार्ग सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जा रहे हैं। केदारनाथ मार्ग पर सोनप्रयाग और गौरीकुंड के पास भूस्खलन की समस्या अक्सर बनी रहती है, जबकि बदरीनाथ मार्ग पर तोता घाटी, लामबगड़, पागल नाला और पीपलकोटी जैसे क्षेत्र जोखिम भरे हैं।

सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

  • यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है।
  • पूरे यात्रा क्षेत्र को 15 सुपर जोन, 41 जोन और 137 सेक्टर में बांटा गया है।
  • हर सेक्टर लगभग 10 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेगा।
  • कंट्रोल रूम में वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई है।

इसके अलावा यात्रा के दौरान 10 से 15 हजार सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाएगी, जिनमें पुलिस, ITBP, CRPF, SDRF और NDRF के जवान शामिल होंगे।

20 से अधिक विभाग रहेंगे सक्रिय

यात्रा प्रबंधन में 20 से ज्यादा विभाग जुटे रहेंगे, जिनमें स्वास्थ्य, लोक निर्माण, बिजली, जल संस्थान, परिवहन, पर्यटन और वन विभाग प्रमुख हैं। इनका उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यात्रा अनुभव देना है।

अब तक 8 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन

  • इस साल अब तक 8 लाख से ज्यादा श्रद्धालु ऑनलाइन पंजीकरण करवा चुके हैं।
  • गंगोत्री-यमुनोत्री के लिए लगभग 1.5 लाख।
  • केदारनाथ-बदरीनाथ के लिए करीब 2.5 लाख पंजीकरण हो चुके हैं।

पिछले साल के आंकड़े

  • केदारनाथ: 17.68 लाख.
  • बदरीनाथ: 16.60 लाख.
  • गंगोत्री: 7.57 लाख.
  • यमुनोत्री: 6.44 लाख श्रद्धालु पहुंचे।

यात्रा का क्रम

सबसे पहले यमुनोत्री, फिर गंगोत्री, उसके बाद केदारनाथ और अंत में बदरीनाथ धाम के दर्शन किए जाते हैं।

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