बाल ठाकरे की विरासत को संभालने की ज़िम्मेदारी लिए आदित्य ठाकरे राजनीति की कठिन राह पर चल तो पड़े हैं। लेकिन उनको इस विधानसभा चुनाव में कड़ी टक्कर देने के लिए वर्ली विधानसभा क्षेत्र से उनके प्रतिद्वंदी होंगे, मुंबई विश्वविद्यालय में क़ानून विभाग के पूर्व प्रमुख साथ ही बीएसपी के संस्थापक सदस्यों में से एक और बीएसपी के महासचिव भी रह चुके सुरेश माने। बता दें कि 59 वर्षीय सुरेश माने वर्ली से कांग्रेस-एनसीपी के गठबंधन के उम्मीदवार होंगे। यह भी ग़ौरतलब है कि सुरेश माने बहुजन रिपब्लिकन सोशलिस्ट पार्टी (BRSP) के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।
सुरेश माने ने बताया है कि वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेंगे। और उन्हें वर्ली और औरंगाबाद (पश्चिम) से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। माने ने कहा कि उनके चुनाव लड़ने के फ़ैसले का आदित्य ठाकरे के नामांकन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मेरा गृह क्षेत्र है। इसलिए मैं यहां से चुनाव लड़ रहा हूं।
आदित्य ठाकरे पर बड़ा बयान देते हुए सुरेश माने ने पूछा कि वह बांद्रा से क्यों नहीं चुनाव लड़े? वह उनका गृह क्षेत्र क्षेत्र है अभी भी वहां सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं। बता दें कि सुरेश माने मूल रूप से कराड के निवासी हैं। और वह अपने कॉलेज के दिनों में मुंबई डेवलपमेंट डायरेक्टरेट (BDD) के निवासी रहे हैं। 2005 के बीच वर्ली नूर में और उसके बाद 2010 से सरेरी में रहने लगे।
वर्ली के विकास की अनदेखी का सत्तारूढ़ पार्टी पर आरोप लगाते हुए माने ने कहा कि वह तटीय सड़क परियोजना के बारे में मछुआरा समुदाय की चिंताओं को दूर करने के अलावा (BDD) चॉल के पुनर्विकास को आगे बढ़ाना चाहते हैं। देखा जाए तो आदित्य ठाकरे के लिए विधानसभा चुनावों की राह बहुत चुनौती भरी होने वाली है, क्योंकि एक तरफ़ राजनीति और चुनावों में अपना पहला क़दम रख रहे आदित्य ठाकरे हैं। तो दूसरी ओर उनके प्रतिद्वंदी हैं, सुरेश माने जो क़ानून और राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी हैं।















