भारत, रूस और चीन को लेकर ट्रम्प ने दिया विवादित बयान

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अपने तीखे बयानों की वजह से सुर्खियों में रहने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से कुछ ऐसा ही बयान दिया है। अपने बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदूषण का मुद्दा उठाते हुए भारत,रूस और चीन की कड़ी आलोचना की है। साथ ही पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने को बिल्कुल जायज़ ठहराते हुए कहा है कि पेरिस जलवायु समझौता अमेरिका के लिए एक मुसीबत था।

पेरिस समझौते की वजह से अमेरिका को अरबों डॉलर का नुकसान होता। ट्रम्प का कहना था कि ये अमेरिका के साथ अन्याय होता। चीन को 2030 तक के लिए छूट मिली हुई है। जबकि भारत को हमें पैसे देने पड़ते क्योंकि वह एक विकासशील देश है। अपने बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अमेरिका भी एक विकासशील देश ही है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका एकतरफ़ा, भयावह, और आर्थिक तौर पर नुकसान दायक पेरिस समझौते से बाहर हो गया जिसमें कहा गया था कि ‘तीन सालों के भीतर अपना बिज़नेस बंद करो’, ‘खनन ना करो’, ‘हमें ऊर्जा की ज़रूरत नहीं है’, भयावह पेरिस समझौते की वजह से अमेरिकी नौकरियां ख़त्म हो रही थीं। और विदेशी प्रदूषकों को संरक्षण मिला हुआ था।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि,अमेरिका के पास तुलनात्मक रूप से कम ज़मीन है। आप चीन, रूस और भारत से तुलना करें तो पाएंगे कि ये देश अपने प्रदूषण के निपटारे के लिए कुछ भी नहीं कर रहे हैं। और सारा कचरा समुद्र में बहाये दे रहे हैं। और समुद्र के ज़रिए इन देशों का कचरा लॉस एंजिलिस आकर तैरता रहता है। साथ ही ये अपने उद्योगों से निकलने वाले धुएँ के निपटारे के लिए भी कुछ नहीं कर रहे। ट्रम्प का कहना था कि कोई माने या ना माने मैं कई मायनों में एक पर्यावरण प्रेमी हूँ। और पूरी धरती पर साफ़ हवा और पानी चाहता हूँ।