- विपक्ष ने काले झंडे लहराकर और वेल में कागज फेंककर जताया विरोध।
- रेखा आर्या से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग।
- प्रश्नकाल में नहीं हो सका एक भी सवाल।
गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र का दूसरा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष के जोरदार विरोध, नारेबाजी और सदन के भीतर प्रदर्शन के बीच सरकार ने ₹7,844.18 करोड़ का अनुपूरक बजट पारित करा लिया। इसके साथ ही सदन में कुल 10 विधेयक भी पारित किए गए। विपक्ष ने सत्र की अवधि बेहद कम रखने और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होने का आरोप लगाया। लगातार हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने मंगलवार दोपहर करीब 1:10 बजे सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। इस तरह भराड़ीसैंण में विधानसभा की कार्यवाही कुल 11 घंटे भी नहीं चल सकी।
विधानसभा सत्र के दूसरे दिन बुधवार के बजाय मंगलवार, 28 अक्टूबर को सुबह कार्यवाही शुरू होते ही सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला। कांग्रेस विधायक काले झंडे लेकर सदन के वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। विपक्ष ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सदन में इस पर चर्चा कराने की मांग की।
रेखा आर्या से जुड़े आरोपों पर विपक्ष का हंगामा
कांग्रेस विधायकों ने मंत्री रेखा आर्या से जुड़े कथित 210 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों का मुद्दा उठाया। विपक्षी सदस्यों ने नियम 310 के तहत इस मामले पर चर्चा कराने की मांग की। कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की, जबकि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या ने सदन में महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया।
दूसरी ओर, रेखा आर्या ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में रही कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का जिक्र किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी विपक्ष की ओर से काम रोको प्रस्ताव लाने की मंशा पर सवाल उठाए। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।
सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी कांग्रेस विधायकों का विरोध जारी रहा। विधायक काले झंडे लेकर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का विरोध नहीं थमा।
प्रश्नकाल में नहीं हो सका एक भी सवाल
विधानसभा सत्र के दूसरे दिन हंगामे का असर प्रश्नकाल पर भी पड़ा। लगातार विरोध और नारेबाजी के बीच प्रश्नकाल समाप्त करने की घोषणा कर दी गई। विपक्ष के विरोध के कारण प्रश्नकाल में एक भी प्रश्न नहीं हो सका। इसके बाद शून्यकाल के दौरान विधायकों ने अपने मुद्दे उठाने की कोशिश की, लेकिन वहां भी हंगामे का माहौल बना रहा। शून्यकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों की ओर से लगाए गए ‘210 का झुमका कहां गिरा’ के नारे ने भी चर्चा बटोरी। विपक्ष मंत्री रेखा आर्या से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर सरकार से जवाब मांग रहा था। शून्यकाल में केवल विधायक मोहम्मद शहजाद ही अपना प्रश्न रख सके।
7,844.18 करोड़ का अनुपूरक बजट पारित
विपक्षी विरोध के बीच सरकार ने 7,844.18 करोड़ का अनुपूरक बजट सदन से पारित करा लिया। बजट पारित होने के दौरान भी कांग्रेस विधायक लगातार नारेबाजी करते रहे। अनुपूरक बजट के साथ कुल 10 विधेयकों को भी सदन की मंजूरी मिली। विपक्ष का आरोप रहा कि इतने महत्वपूर्ण सत्र को सीमित अवधि में समेट दिया गया और जनता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा का अवसर नहीं मिला। कांग्रेस विधायकों ने भ्रष्टाचार, सरकार की जवाबदेही और अन्य जनहित के विषयों पर चर्चा की मांग की। हालांकि, हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही निर्धारित एजेंडे के अनुसार आगे बढ़ती रही।
231.91 करोड़ की 12 विकास योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास
विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण में 231.91 करोड़ रुपये की 12 विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। इनमें 197.87 करोड़ रुपये की छह योजनाओं का शिलान्यास तथा 34.04 करोड़ रुपये की छह योजनाओं का लोकार्पण शामिल रहा। इन योजनाओं में पेयजल, सड़क, शिक्षा, सुरक्षा और पुलिस अवस्थापना से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। सरकार ने इन्हें प्रदेश में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ सत्र
विपक्ष के लगातार विरोध और सदन में बने हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने दोपहर करीब 1:10 बजे कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही भराड़ीसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र समाप्त हो गया। सत्र के दौरान अनुपूरक बजट और विधेयकों का पारित होना जहां सरकार के लिए महत्वपूर्ण रहा, वहीं सीमित अवधि और कम चर्चा को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए। प्रश्नकाल में एक भी सवाल नहीं हो पाने और शून्यकाल में सीमित चर्चा के कारण सदन की कार्यवाही पर भी सवाल खड़े हुए। अब सत्र के दौरान उठे मुद्दों, विशेषकर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग और जनहित के विषयों पर सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।













