Home उत्तराखंड 826 सरकारी स्कूल बंद होने पर CJP का सरकार को 10 दिन...

826 सरकारी स्कूल बंद होने पर CJP का सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम

0
7
  • ‘स्कूल ठीक करो अभियान’ के तहत स्कूलवार रिपोर्ट और शिक्षा रोडमैप जारी करने की मांग.
  • 2 अक्टूबर के बाद आंदोलन की चेतावनी.

देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों के बंद होने और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने पिछले पांच वर्षों में प्रदेश के 826 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के बंद होने को लेकर सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। CJP ने सरकार को 10 दिन का समय देते हुए स्कूलवार रिपोर्ट और शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए स्पष्ट रोडमैप जारी करने की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने पर 2 अक्टूबर के बाद शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

रविवार को देहरादून में आयोजित पत्रकार वार्ता में CJP के नॉर्थ जोन कोऑर्डिनेटर श्रेष्ठ सिंह ने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान उत्तराखंड में 826 प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं। यह आंकड़ा राज्य सरकार की ओर से विधानसभा में दी गई जानकारी पर आधारित है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन स्कूलों के बंद होने का प्रमुख कारण शून्य छात्र नामांकन बताया गया था। पहाड़ी जिलों में स्कूल बंद होने की संख्या अधिक रही है।

स्कूल बंद होने के कारणों की स्कूलवार रिपोर्ट मांगी

श्रेष्ठ सिंह ने सरकार से मांग की कि बंद किए गए सभी 826 स्कूलों की स्कूलवार विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। इसमें प्रत्येक विद्यालय में छात्र संख्या, शिक्षकों की स्थिति, उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं, स्कूल बंद किए जाने का कारण, आसपास की आबादी और निकटतम वैकल्पिक विद्यालय की दूरी जैसी जानकारी शामिल की जाए।

CJP का कहना है कि केवल स्कूल बंद करने के आंकड़े जारी करने के बजाय सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई और दूरस्थ क्षेत्रों में बच्चों को स्कूल तक पहुंचने में किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

270 स्कूलों में पेयजल व्यवस्था पर सवाल

CJP के नॉर्थ जोन कोऑर्डिनेटर ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य के 270 स्कूलों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों के कई विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने का भी आरोप लगाया।

पार्टी ने सरकारी और निजी स्कूलों के बीच बुनियादी सुविधाओं के अंतर को कम करने की मांग की है। CJP के मुताबिक सरकारी स्कूलों में सुरक्षित भवन, बिजली, पेयजल, शौचालय और पर्याप्त शिक्षकों जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।

10 दिन में ‘एजुकेशन रोडमैप’ जारी करने की मांग

CJP ने सरकार से 10 दिनों के भीतर उत्तराखंड एजुकेशन रोडमैप जारी करने की मांग की है। पार्टी के अनुसार इस रोडमैप में जिलावार तरीके से शिक्षकों की नियुक्ति, पेयजल, शौचालय, सुरक्षित भवन, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं को पूरा करने की समयसीमा तय की जानी चाहिए।

इसके साथ ही पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। पार्टी ने स्कूल बस, मिनी बस अथवा अन्य नियमित परिवहन सुविधा सुनिश्चित करने की बात कही है।

जवाब नहीं मिला तो आंदोलन की चेतावनी

CJP ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार 10 दिन के भीतर बंद हुए स्कूलों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट और शिक्षा सुधार का रोडमैप सार्वजनिक नहीं करती है, तो 2 अक्टूबर के बाद प्रदेशभर में शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

श्रेष्ठ सिंह ने यह भी कहा कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में पार्टी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग को आंदोलन का हिस्सा बनाएगी। यह मांग फिलहाल CJP की ओर से की गई राजनीतिक मांग है। सरकार की ओर से इस अल्टीमेटम और पार्टी की मांगों पर प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here