उत्तरकाशी। चारधाम सड़क परियोजना के तहत यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में सोमवार को एक बार फिर भूस्खलन की घटना सामने आई। पोलगांव-बड़कोट छोर से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर मलबा गिरने से सुरंग के भीतर मलबा फैल गया। घटना की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद सुरंग की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि, निर्माण कंपनी ने स्थिति को सामान्य बताते हुए किसी तरह के खतरे से इनकार किया है। निर्माण कंपनी नवयुगा इंजीनियरिंग लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर श्रीराम के अनुसार, सुरंग के अंदर करीब 1300 मीटर की दूरी पर कुछ मलबा गिरा है। इसे हटाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान इस तरह मलबा गिरता रहता है और फिलहाल स्थिति चिंताजनक नहीं है।
2023 के हादसे की याद हुई ताजा
सिलक्यारा सुरंग में भूस्खलन की घटना ने नवंबर 2023 के उस हादसे की याद फिर ताजा कर दी, जब सुरंग के सिलक्यारा छोर से करीब 200 मीटर अंदर भारी मलबा गिरने के कारण निर्माण कार्य में जुटे 41 श्रमिक 17 दिनों तक सुरंग के भीतर फंसे रहे थे। लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।
उस हादसे के बाद सुरंग की सुरक्षा और निर्माण कार्य को लेकर कई स्तरों पर सवाल उठे थे। इसके बावजूद समय-समय पर सुरंग में मलबा गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
2018 में शुरू हुआ था सुरंग का निर्माण
सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग का निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था और इसे वर्ष 2022 तक पूरा किया जाना था। तकनीकी दिक्कतों और विभिन्न कारणों से परियोजना निर्धारित समय पर पूरी नहीं हो सकी। वर्ष 2024 में सुरंग को सफलतापूर्वक आर-पार किया गया।
वर्तमान में सुरंग का करीब 90 प्रतिशत सिविल कार्य पूरा होने की बात कही जा रही है। निर्माण पूरा करने का लक्ष्य मार्च 2027 रखा गया है।
करीब 4.5 किलोमीटर लंबी सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग उत्तराखंड की सबसे लंबी निर्माणाधीन सड़क सुरंगों में शामिल है। ऐसे में सोमवार को फिर मलबा गिरने की घटना के बाद निर्माण कार्य के साथ-साथ सुरंग की सुरक्षा व्यवस्था पर भी निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।















