देहरादून। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) के कुलपति नवीन चंद्र लोहनी ने देहरादून स्थित विश्वविद्यालय के उपकेंद्र में पत्रकारों से वार्ता कर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई सुविधाओं और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास विद्यार्थियों को घर बैठे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अध्ययन सामग्री और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
कुलपति ने बताया कि विद्यार्थियों की सुविधा के लिए अध्ययन सामग्री ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही ऑफलाइन अध्ययन सामग्री भी डाकघर के माध्यम से विद्यार्थियों को भेजी जा रही है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री के लिए विश्वविद्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
बीईजी रुड़की और सितारगंज जेल में परीक्षा केंद्र
नए शिक्षा सत्र के लिए विश्वविद्यालय ने दो महत्वपूर्ण पहल की हैं। रुड़की स्थित बीईजी (बंगाल इंजीनियरिंग ग्रुप) रुड़की को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। इसका सीधा लाभ सेना में कार्यरत उन जवानों को मिलेगा, जो उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर रहे हैं। इसी क्रम में सितारगंज जेल में भी विश्वविद्यालय का अध्ययन एवं परीक्षा केंद्र शुरू करने की तैयारी है। इससे जेल में निरुद्ध बंदियों को उच्च शिक्षा हासिल करने के साथ-साथ विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययन का अवसर मिलेगा। वहीं, परीक्षा आयोजन को लेकर जेल प्रशासन के सामने आने वाली संभावित चुनौतियां भी कम होंगी।
गढ़वाली-कुमाऊंनी के बाद जौनसारी पर फोकस
कुलपति नवीन चंद्र लोहनी ने बताया कि विश्वविद्यालय में गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषाओं में डिप्लोमा पाठ्यक्रम पहले से संचालित किए जा रहे हैं। अब जौनसारी लोकभाषा को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने की तैयारी है। इसके अलावा उत्तराखंड की अन्य लोकभाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में नेपाली भाषा का पाठ्यक्रम भी उपलब्ध है। आने वाले समय में चीनी, स्पेनिश सहित अन्य विदेशी भाषाओं में डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसके साथ ही मैनेजमेंट से जुड़े नए पाठ्यक्रम विकसित करने पर भी काम चल रहा है।
शोधार्थियों के लिए एक लाख रुपये तक का अनुदान
विश्वविद्यालय के प्रोफेसर गिरिजा पांडे ने बताया कि शोध को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय नई लघु शोध योजना शुरू करने जा रहा है। इसके तहत शोधार्थियों को एक लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि शोध पत्र प्रकाशित करने वाले शोधार्थियों के लिए प्रोत्साहन पुरस्कार की व्यवस्था भी की गई है। इसके तहत पात्र शोधार्थियों को 11 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह पहल मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत संचालित की जा रही है।
वोकेशनल और एआई कोर्स शुरू करने की तैयारी
विश्वविद्यालय रोजगारपरक शिक्षा पर भी विशेष जोर दे रहा है। इसके तहत जल्द ही कई नए वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में भी तेजी से काम किया जा रहा है। कुलपति ने कहा कि बदलती तकनीक, शिक्षा और रोजगार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय लगातार अपने पाठ्यक्रमों का विस्तार कर रहा है। उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के साथ कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।














