- महिला किसानों की करीब 50 प्रतिशत भागीदारी, पूर्व सैनिक परिवारों और प्रगतिशील किसानों का सम्मान
गदरपुर। कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें सहकारिता के माध्यम से बाजार, तकनीक एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से सोमवार को गदरपुर स्थित शहनाई वाटिका में ‘सहकारिता एवं किसान महासम्मेलन-2026’ का आयोजन किया गया। कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) की निदेशक शिल्पी अरोड़ा के नेतृत्व में आयोजित सम्मेलन में ऊधम सिंह नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों किसान, महिला किसान, सहकारी समितियों के प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
सम्मेलन की खास बात महिला किसानों की बड़ी भागीदारी रही। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में करीब 50 प्रतिशत महिला किसान शामिल हुईं। वर्ष 2026 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ घोषित किए जाने के संदर्भ में इस भागीदारी को कृषि एवं सहकारिता क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का संकेत बताया गया।

वीडियो संदेश के जरिए वन मंत्री ने दी बधाई
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन एवं वन्यजीव मंत्री सुबोध उनियाल व्यस्तता के कारण सम्मेलन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हो सके। उन्होंने वीडियो संदेश के माध्यम से आयोजन की सफलता पर कृभको और किसानों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलनों के माध्यम से किसानों को नई कृषि तकनीक, बाजार और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सहकारिता के माध्यम से क्षेत्र के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों को गति मिलेगी।
सम्मेलन में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़, गदरपुर विधायक एवं पूर्व खेल मंत्री अरविंद पांडे, जसपुर विधायक आदेश सिंह चौहान, पूर्व जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष सुभाष बेहड़, समीर पाठक समेत कई जनप्रतिनिधि, सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी और प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।
महिला किसानों को तकनीक और बाजार से जोड़ने पर जोर
कृभको निदेशक शिल्पी अरोड़ा ने किसानों और अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका अब केवल खेती तक सीमित नहीं है। महिलाएं उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और उद्यमिता के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि महिला किसानों को बाजार, तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय अवसरों से जोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसान और सहकारी समितियां मिलकर मजबूत आर्थिक मॉडल तैयार कर सकते हैं। किसान उत्पादन करे और सहकारी संस्थाएं उसकी उपज को प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, विपणन और बाजार से जोड़ें तो किसानों की आय और आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है।
मृदा परीक्षण और जैविक खेती पर जोर
शिल्पी अरोड़ा ने किसानों से मृदा परीक्षण कराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मिट्टी की गुणवत्ता और पोषक तत्वों की सही जानकारी होने से किसान अनावश्यक खर्च कम कर बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं। उन्होंने जैविक खेती, प्रमाणित बीजों और स्थानीय उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास करने की बात कही।
उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत में खाद्यान्न की उपलब्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा में किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि एवं सहकारी व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसलिए किसानों को मजबूत करना देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के समान है।
कृभको का उर्वरक कोटा बढ़ाने की मांग
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ ने किसानों के हित में कृभको की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उत्तराखंड में कृभको के उर्वरक की उपलब्धता बढ़ाने और राज्य का कोटा बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
गदरपुर विधायक अरविंद पांडे ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसान बिचौलियों से बचकर अपनी उपज का उचित मूल्य हासिल कर सकता है। वहीं जसपुर विधायक आदेश सिंह चौहान ने कहा कि किसान आधुनिक तकनीक और नई कृषि पद्धतियों को तेजी से अपना रहा है। किसानों और सहकारी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय को उन्होंने समय की जरूरत बताया।
कृभको के क्षेत्रीय प्रबंधक तेजेंद्र सिंह ने किसानों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी दी।
पूर्व सैनिक परिवारों और प्रगतिशील किसानों का सम्मान
सम्मेलन में देश सेवा और कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को सम्मानित किया गया। हवलदार हीरा सिंह, द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिक रहे स्व. इकबाल सिंह की पत्नी मान कौर और बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले सूबेदार मेजर खड़क सिंह कार्की को सम्मानित किया गया।
इसके अलावा जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले प्रगतिशील किसान सुरजीत डाबर और महिला एफपीओ की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीमा ठुकराल को भी सम्मानित किया गया।
‘किसान मजबूत होगा तो सहकारिता मजबूत होगी’
सम्मेलन का मुख्य संदेश किसान और सहकारिता को एक-दूसरे का पूरक बनाना रहा। वक्ताओं ने कहा कि किसानों को उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, विपणन और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में सहकारी संस्थाएं प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम के अंत में कृभको के क्षेत्रीय अधिकारी जाबर सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। कृभको निदेशक शिल्पी अरोड़ा ने कहा कि किसानों के साथ निरंतर संवाद कर उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार तलाशने, जैविक खेती को बढ़ावा देने और सहकारिता के माध्यम से किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसान मजबूत होगा तो सहकारिता मजबूत होगी और सहकारिता मजबूत होगी तो गांव और देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।













