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कुलगाम में प्रवासी मजदूर की हत्या से फिर उभरा टारगेट किलिंग का खतरा

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श्रीनगर। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में प्रवासी मजदूर की हत्या ने घाटी में एक बार फिर टारगेट किलिंग की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में आतंकी शिक्षक, कश्मीरी पंडित, बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी और प्रवासी मजदूरों को चुन-चुनकर निशाना बनाते रहे हैं।

ताजा घटना में आतंकियों ने ईंट भट्ठे के पास मौजूद दो प्रवासी मजदूरों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। हमले में दीपक (24) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल भूपेंद्र (28) ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के अनुसार दीपक की मौत अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हुई। घटना के बाद पुलिस, सेना और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मौके पर पहुंचकर अभियान की निगरानी कर रहे हैं।

वर्षों से जारी है टारगेट किलिंग

घाटी में आम नागरिकों और बाहरी राज्यों के लोगों पर हमलों का सिलसिला समय-समय पर सामने आता रहा है। वर्ष 2022 में टारगेट किलिंग की घटनाओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जब बैंक अधिकारियों, शिक्षकों, कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और प्रवासी मजदूरों को लगातार निशाना बनाया गया।

इसके बाद भी कई बड़ी घटनाएं हुईं। अक्टूबर 2024 में गांदरबल के गगनगीर स्थित जेड-मोड़ सुरंग परियोजना शिविर पर हुए आतंकी हमले में सात लोगों की मौत हुई थी। अप्रैल 2024 में अनंतनाग में बिहार के मजदूर राजू शाह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जनवरी 2023 में राजोरी के डांगरी गांव में आतंकी हमलों और आईईडी विस्फोट में सात लोगों की जान गई थी।

2022 और 2021 में भी कई वारदातें

जून 2022 में कुलगाम में राजस्थान के बैंक प्रबंधक विजय कुमार और बडगाम में बिहार के मजदूर दिलखुश कुमार की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसी वर्ष कुलगाम में शिक्षिका रजनी बाला तथा बडगाम में कश्मीरी पंडित कर्मचारी राहुल भट की भी आतंकियों ने हत्या कर दी थी।

अक्टूबर 2021 में कुलगाम, पुलवामा और श्रीनगर सहित कई इलाकों में प्रवासी मजदूरों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया। इसी दौरान श्रीनगर के एक सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य सुपिंदर कौर और शिक्षक दीपक चंद की हत्या तथा प्रसिद्ध फार्मासिस्ट माखन लाल बिंदरू और रेहड़ी विक्रेता वीरेंद्र पासवान की हत्या ने घाटी में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

मजदूरों में बढ़ी चिंता

लगातार हो रही टारगेट किलिंग की घटनाओं से घाटी में काम करने वाले बाहरी राज्यों के मजदूरों में भय का माहौल है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में मजदूर निर्माण कार्य, ईंट भट्ठों और अन्य असंगठित क्षेत्रों में रोजगार के लिए जम्मू-कश्मीर आते हैं। ऐसी घटनाओं का असर न केवल उनकी सुरक्षा पर पड़ता है, बल्कि विकास कार्यों पर भी पड़ने की आशंका रहती है।

सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

सुरक्षा एजेंसियों ने घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर आतंकियों की तलाश तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हमले में शामिल आतंकियों की पहचान कर उन्हें जल्द पकड़ने या निष्क्रिय करने के लिए अभियान जारी है।

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