गैरसैंण: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में पेश 1,11,703.21 करोड़ रुपये के बजट को ‘संतुलन’ (SANTULAN) के आठ अक्षरों पर आधारित अनूठे मॉडल से सजाया है। प्रत्येक अक्षर एक मूल मंत्र का प्रतिनिधित्व करता है, जो राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित, समावेशी और तीव्र विकास की दिशा तय करता है। यह बजट न केवल आंकड़ों का संग्रह है, बल्कि 2047 तक विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव रखने वाली दूरदर्शी सोच है।
प्रमुख प्रावधान
- S – समावेशी विकास (Inclusive Development) समाज के हर वर्ग, विशेषकर कमजोर तबकों को मुख्यधारा में लाने पर फोकस। सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और पोषण योजनाओं को मजबूत किया गया।
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाएं: ~1,327.73 करोड़ रुपये.
- अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना: 600 करोड़ रुपये.
- सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0: ~598.33 करोड़ रुपये.
- ईडब्ल्यूएस आवास अनुदान: 25 करोड़ रुपये.
- मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट, आंचल अमृत, वात्सल्य योजना, महिला पोषण योजना आदि: कुल कई सौ करोड़ों में प्रावधान.
- प्रसूता के लिए ईजा-बोई शगुन योजना: ~14.13 करोड़ रुपये.
- A – आत्मनिर्भर उत्तराखंड (Self-Reliant Uttarakhand) स्थानीय संसाधनों पर आधारित स्वरोजगार, कृषि, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा।
- पशुपालन स्वरोजगार योजनाएं: ~42.02 करोड़ रुपये.
- मिशन एप्पल: 42 करोड़ रुपये.
- ट्राउट प्रोत्साहन योजना: ~39.90 करोड़ रुपये.
- उच्च मूल्य फल (कीवी, ड्रैगन फ्रूट): ~30.70 करोड़ रुपये.
- चाय विकास, सगंध पौधा केंद्र: 25-24 करोड़ रुपये.
- मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना: 60 करोड़ रुपये.
- स्टार्टअप वेंचर फंड: 25 करोड़ रुपये.
- सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम सहायता: 75 करोड़ रुपये.
- इको-टूरिज्म: ~18.50 करोड़ रुपये.
- N – नई सोच (New Thinking) नवाचार, तकनीक, शिक्षा और आधुनिकता को अपनाने पर जोर।
- संस्कृत पाठशालाएं: 28 करोड़ रुपये.
- खनन सर्विलांस: 24.50 करोड़ रुपये.
- छात्रवृत्तियां (विद्यालयी/उच्च शिक्षा/खेल): 15-13.50 करोड़ रुपये.
- राज्य डाटा सेंटर सुदृढ़ीकरण: 65 करोड़ रुपये.
- सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना: ~47.50 करोड़ रुपये.
- साइबर सिक्योरिटी: 15 करोड़ रुपये.
- एआई एवं इमर्जिंग टेक्नोलॉजी: ~11.50 करोड़ रुपये.
- यूनीफॉर्म सिविल कोड: 5 करोड़ रुपये.
- T – तीव्र विकास (Rapid Development) बुनियादी ढांचे में तेजी से निवेश।
- पीएमजीएसवाई (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना): 1,050 करोड़ रुपये.
- गड्ढा मुक्त सड़क अभियान: 400 करोड़ रुपये.
- नागरिक उड्डयन विभाग: ~52.50 करोड़ रुपये.
- नंदा देवी राजजात यात्रा: 25 करोड़ रुपये.
- U – उन्नत शहर एवं गांव (Advanced Cities & Villages) ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का संतुलित उन्नयन।
- विकसित भारत @2047: ~705.25 करोड़ रुपये.
- ग्रामीण विकास विभाग पूंजीगत: 1,642.20 करोड़ रुपये.
- वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: 40 करोड़ रुपये.
- शहरी निकाय: 1,814 करोड़ रुपये.
- पंचायती राज संस्थाएं: 1,491 करोड़ रुपये.
- आवास विकास अवसंरचना: 130 करोड़ रुपये.
- L – लोक सहभागिता (Public Participation) जनता की भागीदारी से योजनाओं का क्रियान्वयन।
- आईटीडीए अनुदान/सूचना प्रौद्योगिकी सुदृढ़ीकरण: 25 करोड़ रुपये.
- राज्य डाटा सेंटर: 40 करोड़ रुपये.
- एआई मिशन एसपीवी: 25 करोड़ रुपये.
- विज्ञान केंद्र चंपावत: 10 करोड़ रुपये.
- A – आर्थिक शक्ति (Economic Strength) आर्थिक मजबूती के लिए निवेश और उद्योग प्रोत्साहन।
- रिस्पना बिंदाल एलिवेटेड यूटिलिटी: 350 करोड़ रुपये.
- टिहरी रिंग रोड: 10 करोड़ रुपये.
- स्टार्टअप, एमएसएमई, मेगा इंडस्ट्रियल नीति: 25-75 करोड़ रुपये.
- इको-टूरिज्म और निवेश प्रोत्साहन: 18.50-30 करोड़ रुपये.
- N – न्यायपूर्ण व्यवस्था (Just System) कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और न्याय पहुंच को मजबूत करना।
- पुलिस आवास: 100 करोड़ रुपये.
- इंडिया रिजर्व वाहिनी: 10 करोड़ रुपये.
- स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स: 10 करोड़ रुपये.
- जेल निर्माण/भूमि क्रय: 25 करोड़ रुपये.
- फास्ट ट्रैक विशेष कोर्ट (रेप एवं पॉक्सो): 3.42 करोड़ रुपये.
- उत्तराखंड न्यायिक अकादमी: 6.96 करोड़ रुपये.















