सीएम केजरीवाल ने 49 दिनों की सरकार में गैरकानूनी तरीके दिया था धरना

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नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य लोगों ने रेल भवन के पास बिना इजाज़त, गैर कानूनी तरीके से धरना प्रदर्शन किया था। इस मामले में आरोप तय करने को लेकर रॉउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

आरोपों पर बहस के दौरान आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और प्रवक्ता आशुतोष, दिल्ली सरकार के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती कोर्ट में मौजूद थे। इस मामले में दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उप मुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया और विधायक राखी बिड़लान समेत सभी आरोपी जमानत पर है। क्या है मामला ?

साल 2014 में दिल्ली में 49 दिन की सरकार के समय मुख्यमंत्री पद पर रहते अरविंद केजरीवाल दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग को लेकर रेल भवन पर धरने पर बैठ गए थे। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने साउथ दिल्ली में वैश्यावृति और ड्रग्स के रैकेट चलवाने का आरोप लगाते हुए पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए यह धरना प्रदर्शन किया था।

इस मामले में पुलिस ने अदालत में पेश अपनी चार्जशीट में ‘आप’ नेताओं पर धरने में शामिल होने और कानून का माखौल उडा़ते हुए इसे लगातार जारी रखने, लोकसेवकों द्वारा पुलिस कार्रवाई में बाधा डालने और हिंसा करने का मामला दर्ज किया था।

धरने में अरविंद केजरीवाल के साथ बड़ी तादात में समर्थकों ने रेल भवन के बाहर धरना दिया था। पुलिस ने नेताओं के खिलाफ निषेधाज्ञा का उल्लंघन ( धारा 144 ) करने और गैर कानूनी रूप से धरना प्रदर्शन करने के आरोप में 5 ‘आप’ कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया था। कोर्ट अब 5 जुलाई को मामले में आरोपों पर फैसला सुनाएगा।