मणिशंकर अय्यर खुद को उल्लू बताकर कर गए एक बड़ी गलती !

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सोशल मीडिया पर जश्न का माहौल है। मणिशंकर अय्यर लौट आए हैं। 2017 के गुजरात चुनाव से ठीक पहले पीएम मोदी को नीच कहकर उन्होंने जो कॉन्टेंट उपलब्ध कराया था, उससे सोशल मीडिया यूजर्स की उम्मीद बढ़ गई थी। इस लोकसभा चुनाव में सैम पित्रोदा ने थोड़ा उन तक पहुंचने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। उनके लौटने से बीजेपी में बहार आई हुई है। लग रहा है कि वो एक बयान देकर बाजी बीजेपी के हाथ लगा देंगे। लेकिन मणिशंकर अय्यर ने ऐसा कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा ‘मैं उल्लू हूं लेकिन इतना बड़ा उल्लू नहीं हूं।’

इसके अलावा भी उन्होंने सवाल पूछने वाले से कहा कि आप लोग मधुमक्खी हो। मेरा रस निकालकर दूसरे फूल पर चले जाओगे। यानी अगले को मधुमक्खी और खुद को उल्लू कह गए मणिशंकर अय्यर, ये भी कहा कि इतना बड़ा उल्लू हूं। तो सवाल ये उठ खड़ा हुआ है कि कितने बड़े उल्लू हैं।

उल्लू का साहित्यिक, राजनैतिक, ऐतिहासिक, आर्थिक, सामाजिक विवेचना करने से पहले बड़े और छोटे उल्लू के बारे में जान लेते हैं। सबसे बड़ा जो उल्लू होता है उसका नाम है यूरेशियन ईगल आउल। आउल समझे न? OWL आउल, आउल माने उल्लू। इस उल्लू की लेंथ 30 इंच तक हो सकती है। दोनों पंख फैलाए तो 6 फिट से ज्यादा जगह घेरते हैं।

सबसे छोटा उल्लू एल्फ आउल होता है। ये 5 से 6 इंच का होता है बस। दोनों पंख फैलाने पर 10 इंच तक जाते हैं, यानी एक फिट भी नहीं। इन बड़े और छोटे उल्लुओं के अलावा दुनिया में लगभग 200 प्रजातियों के उल्लू पाए जाते हैं। इनमें से वो वाले कौन हैं, पहचानना बड़ा मुश्किल है।

हमारे समाज में उल्लू की बड़ी इज्जत और बेइज्जती है। दिवाली की रात किसी को उल्लू दिख जाए तो खुशी का ठिकाना नहीं रहता। वो लक्ष्मी की सवारी है। उल्लू लेकर आएगा तभी तो लक्ष्मी घर आएगी। कभी कोई मूर्खता का काम कर जाए तो उसे उल्लू या उल्लू का पट्ठा कहकर बेइज्जत किया जाता है।

2015 में एक सस्ती कॉमेडी फिल्म ‘हम सब उल्लू हैं’ भी आई थी। लेकिन लक्ष्मी की कृपा उस फिल्म पर नहीं हुई। जग्गा जासूस फिल्म में ‘दिल उल्लू का पट्ठा है’ गाना था। ये फिल्म भी पिट गई थी।

अगर आप सोच रहे हैं कि हम ये उल्लू पुराण क्यों बांच रहे हैं तो ठहरिए, इसमें फिर भी पॉलिटिकल-नॉन पॉलिटिकल इंटरव्यू से ज्यादा जानकारी मिल जाएगी।