सबरीमाला मंदिर के रिवाज हिंदू महिलाओं के खिलाफ :सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्‍ली : सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में युवा महिलाओं के प्रवेश पर रोक को महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बताया। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। न्‍यायालय की संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि महिलाएं पुरुषों से किसी मामले में कम नहीं है। सबरीमाला मंदिर के रिवाज हिंदू महिलाओं के खिलाफ हैं। दैहिक नियमों पर महिलाओं को रोकना एक तरह से छूआछूत है।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भगवान अयप्‍पा हिंदू थे, उनके भक्‍तों का अलग धर्म न बनाएं। भगवान से रिश्‍ते दैहिक नियमों से नहीं तय हो सकते। सभी भक्‍तों को मंदिर में जाने और पूजा करने का अधिकार है। न्‍यायालय ने कहा, जब पुरुष मंदिर में जा सकते हैं तो औरतें भी पूजा करने जा सकती हैं। महिलाओं को मंदिर में पूजा करने से रोकना महिलाओं की गरिमा का अपमान है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एक तरफ हम औरतों की पूजा करते हैं तो दूसरी तरफ हम उन पर बैन लगाते हैं। महिलाएं पुरुषों से किसी भी मामले में कम नहीं हैं।

आपको बता दें कि केरल के सबरीमाला मंदिर में 15 साल से ऊपर की लड़कियां और महिलाओं को प्रवेश करने पर मंदिर प्रशासन ने रोक लगायी थी। यहां सिर्फ छोटी बच्चियां और बूढ़ी महिलाएं ही प्रवेश कर सकती हैं। इसके पीछे मान्यता है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे। सबरीमाला मंदिर में हर साल नवम्बर से जनवरी तक, श्रद्धालु अयप्पा भगवान के दर्शन के लिए जाते हैं, बाकि पूरे साल यह मंदिर आम भक्तों के लिए बंद रहता है।

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