‘हिंदी पत्रकारिता के बढ़ते चरण का लोकार्पण’

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मुंबई। वरिष्ठ पत्रकार-लेखक-संपादक नंदकिशोर नौटियाल के व्यक्तित्व, कृतित्व और स्वराज्यपूर्व तथा स्वराज्योत्तर पत्रकारिता पर आधारित ‘हिंदी पत्रकारिता के बढ़ते चरण’ ग्रंथ का लोकार्पण कला-साहित्य-संस्कृति की प्रतिनिधि संस्था ‘परिवार’ के तत्वावधान में नववर्ष शनिवार 6 जनवरी को प्रबुद्ध पत्रकारों एवं साहित्यकारों से खचाखच भरे आइ.ऐम.सी, वालचंद हीराचंद सभागृह में संपन्न हुआ तथा ग्रंथ के केंद्रबिंदु नंदकिशोर नौटियाल का मुख्य अतिथि विश्वनाथ सचदेव के हाथों शाल-श्रीफल पुष्पगुच्छ के साथ ‘सारस्वत सम्मान’ सम्मान किया गया।

ग्रंथ के संपादक डॉ. त्रिभुवन राय ने ग्रंथ का परिचय दिया और प्रस्तुत ग्रंथ को हिंदी पत्रकारिता का इतिहास बताते हुए आज़ादी से पहले और आज़ादी के बाद की पत्रकारिता में समयानुकूल भाषा के बदलते हुए रूप को सही ठहराया। कहा कि पत्रकारिता की भाषा में यह बदलाव मिशनरी पत्रकारिता के स्तंभ बाबूराव विष्णु पराडकर ने शुरू किया था, जिन्होंने देश को ‘राष्ट्रपति’, ‘सर्वश्री’ जैसे शब्द दिये हैं, जिसे नंदिकशोर नौटियाल ने आगे बढ़ाया है।

नंदकिशोर नौटियाल ने इस अवसर पर अपने मंतव्य में कहा कि एक पत्रकार को समाज के लिए अहितकर हर बात का “निर्भीक, निर्वैर, निष्पक्ष” समालोचक होना चाहिये तथा चिंता व्यक्त की कि आज का मिडिया भाषा तथा सामाजिक तक़ाज़ों के लिए घातक साबित हो रहा है। पत्रकारिता ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है और सोशल मीडिया विषवमन कर रहा है।

मुख्य अतिथि, हिंदी ‘नवनीत’ के संपादक वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ सचदेव ने आज की पत्रकारिता के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि जो पत्रकारिता पहले जनोन्मुखी हुआ करती थी वह आज अर्थोन्मुखी हो गयी है। उन्होंने कहा कि अपनी व्यावसायिकता के कारण ही आज की पत्रकारिता ने पाठकों का भरोसा खो दिया है। उन्होंने नौटियालजी के हिंदी ‘ब्लिट्ज़’ के संपादकीय काल के दौरान उनके द्वारा उठाये गये कई साहसिक निर्णयों का उल्लेख किया और कहा कि हर परिस्थिति में नौटियालजी ने पाठकों का भरोसा और अखबार की विश्वसनीयता को बनाये रखा। इसी कारण उनके संपादकत्व में हिंदी ‘ब्लिट्ज़’ नयी ऊँचाइयाँ छू सका।

समारोह अध्यक्ष, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के कार्याध्यक्ष,  नंदलाल पाठक ने अखबार, पत्रकार और सामाजिक सरोकारों में सामंजस्य बनाये रखने पर जोर दिया। उन्होंने नौटियालजी को पर्वत-सा दृढ़ और सागर सा गंभीर बताया।

वरिष्ठ लेखिका डॉ. राजम नटराजन पिल्लै ने नौटियाल को सोने की गिन्नी बताते हुए कहा कि यह चलन में भले ही न हो लेकिन विश्वसनीय बहुत है, और उनके साथ काम कर चुके अनेक सहकर्मियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वे मीडिया में सफलता के शिखर पर हैं।

महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह ने अनेक आख्यायिकाओं को नौटियालजी के कृतित्व और व्यक्तित्व पर निरूपित करते हुए उन्हें राष्ट्रभाषा हिंदी और राष्ट्रीय सरोकारों का भीष्म पितामह बताया।

विशिष्ट अतिथि ‘दोपहर’ के संपादक रामकिशोर त्रिवेदी ने नौटियालजी को सामाजिक सरोकारों के लिए प्रतिबद्ध आदर्श पत्रकार बताया और कहा कि ‘दोपहर’ जो स्व. डॉ. राममनोहर त्रिपाठी और नौटियालजी ने शुरू किया था, उसका कार्यभार लेकर हम गैर-प्रतिष्ठानी पत्रकारिता की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

समारोह में ‘हिंदुस्तानी ज़बान’ की पूर्व संपादक डॉ. सुशीला गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार हरि मृदुल, ‘हिंदुस्तानी ज़बान युवा’ के संपादक संजीव निगम, उर्दू के नये प्रकाशन ‘हम आप’ के संपादक सैयद जलालुद्दीन आज़मी, ‘दोपहर’ के पूर्व संपादक निज़ामुद्दीन राईन, राजू पटेल, वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकांत जोशी, वेंकटेश देवस्थान के प्रमुख ट्रस्टी, रामनारायण सोमानी, वरिष्ठ पत्रकार प्रीतम सिंह त्यागी, डी के जोशी, गोपाल शर्मा, अनिल त्रिवेदी, मदनमोहन गोस्वामी, राकेश खंखरियाल ने नौटियालजी को बधाई दी|

सिंधी अकादमी के अध्यक्ष डॉ. दयाल आशा ने सिंधी पगड़ी पहनाकर नौटियालजी का सम्मान किया।

नंदकिशोर नौटियाल का पुष्पगुच्छ आदि से सम्मान करनेवालों में राजनेता भँवर सिंह राजपुरोहित, लालबहादुर शास्त्री स्मृति समिति के जगदीश पुरोहित, उत्तरांचल मित्र मंडल के महेश नैनवाल, महनर सिंह दसौनी, गढ़वाल भ्रातृ मंडल के रमनमोहन कुकरेती व बिष्टजी, उत्तराखंडी सांस्कृतिक संस्था कौथिग फाउंडेशन के संस्थापक केशरसिंह बिष्ट, मोहन सिंह बिष्ट, सुरेश काला, जगजीवन, हर्ष मनराल, गिरेन्द्र मित्तल व मनोज भट्ट आदि के अलावा समारोह में पधारे साहित्य तथा पत्रकारिता की कई जानी-मानी विभूतियों ने अभिनंदन किया|

कार्यक्रम के प्रारम्भ में ‘परिवार’ के उपाध्यक्ष सुरेंद्र गाड़िया ने स्वागत भाषण दिया। समारोह में अतिथियों का स्वागत परिवार संस्था के कोषाध्यक्ष, राकेश मुरारका, सहमंत्री, अशोक अग्रवाल, संयोजक, विनोद चोटिया और प्रचार मंत्री राजीव नौटियाल ने किया। आभार प्रकट महामंत्री सुरेशचंद्र शर्मा ने किया तथा कार्यक्रम का संचालन देवमणि पांडेय ने किया।

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