चित्तौड़ का किला भी फिल्म पद्मावती के विरोध में हुआ शामिल

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उदयपुर। चित्तौड़ के जिस किले में महारानी पद्मावती ने हजारों क्षत्राणियों के साथ अपनी और उनकी अस्मत बचाने के लिए स्वयं को जौहर की आग में आहूत कर दिया था वही किला आज पद्मावती फिल्म के विरोध में शामिल हो चुका है।
कई राजपूत संगठनों और राजपूताने का राजघरानों के लोगों के आह्वान पर फिल्म पद्मावती के विरोध को लेकर शुक्रवार को चित्तौड़गढ़ किले के पाडनपोल द्वार को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया। किला बंद होने के बाद पर्यटक निराश हो गए।
उल्लेखनीय है कि सर्वसमाज ने फिल्म पद्मावती के विरोध में 17 नवंबर को चित्तौड़ किला बंद रखने का ऐलान किया था। पाडनपोल धरना स्थल पर चेतावनी दी थी कि 16 नवंबर तक फिल्म पर बैन नहीं लगा तो 17 को किलाबंदी कर पर्यटकों का प्रवेश रोक दिया जाएगा। इसके बाद शुक्रवार को किला बंद करवा दिया गया।

जौहर स्मृति संस्थान के अध्यक्ष उम्मेदसिंह धौली के मुताबिक शुक्रवार को किला पर्यटकों के लिए बंद रहेगा, हालांकि किले में रहने वालों की आवाजाही जारी रहेगी। यहां आने वाली ट्रेनों व बसों पर भी कोई पाबंदी नहीं है।

अब तक के इतिहास में दुर्ग पर पर्यटकों का प्रवेश पहली बार बंद किया गया है। जानकारों के अनुसार इससे पहले 1992, 2002 और 2008 में शहर में कर्फ्यू या सांप्रदायिक तनाव के दौरान जरूर पर्यटक दुर्ग पर नहीं जा सके थे, लेकिन तब इसके लिए औपचारिक ऐलान नहीं हुआ था। इस दौरान पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के माकूल इंतजाम रखे।
चित्तौड़ फोर्ट पर शुक्रवार के हालात को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि शनिवार को भी किला बंद रह सकता है। इस आशंका के मद्देनजर और व्यवस्था बनाए रखने के लिए किले पर भारी संख्या में पुलिस तैनात है।

बता दें कि राजस्थान के उदयपुर के पास स्थित चित्तौड़ के दुर्ग को देखने दुनिया भर से पर्यटक आते हैं। इसी किले के प्रांगण में बने कुंड में रानी पद्मावती ने हजारों राजपूत स्त्रियों के साथ धधकती आग में कूदकर अपने स्वाभिमान और शील की रक्षा किया था। जौहर की इस लपट को लोग आज भी वहां पहुंचकर महसूस करते हैं।

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