असम में अवैध रूप से घुसे 42 हजार लोगों का पता नहीं

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देश के पूर्वोत्तर राज्यों में रोहिंग्या शरणार्थियों की घुसपैठ एक बड़े खतरे के रूप में देखी जा रही है सुरक्षा एजेंसियां और सीमा सुरक्षा बल इस खतरे पर अपने पैनी नजर गड़ाए हुए हैं। वहीं दूसरी ओर असम में पुलिस उन 42 हजार विदेशियों की तलाश कर रही है जो राज्य में प्रवेश के बाद गायब हो गए थे। ये लोग 1985 से गायब हैं।

असम में बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ एक बड़ा मसला है। स्पेशल डीजीपी बॉर्डर आरएम सिंह का कहना है कि पिछले डेढ़ साल में पुलिस ने 2,500 विदेशियों को पकड़ा है, जो गायब हो गए थे। करीब 42 हजार फॉरेनर्स हैं जो अभी भी राज्य में गायब हैं।

असम में करीब 100 फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल्स ऑपरेट कर रहे हैं। राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने अंडर परफॉर्मेंस के कारण फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल्स के 19 सदस्यों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। साथ ही 15 अन्य सदस्यों को प्रदर्शन में सुधार के लिए कहा है। मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि अगर ये जज 6 महीने में अपनी परफॉर्मेंस में सुधार करने में विफल रहते हैं और लंबित मामलों को संतोषजनक ढंग से नहीं निपटाते हैं तो उन्हें हटा दिया जाएगा। राज्य सरकार के पास उपलब्ध आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि 1985 में असम समझौते पर हस्ताक्षर और इस साल जून के बीच 4,84,381 मामले फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल्स को रेफर किए गए। 86,489 लोगों को विदेशी घोषित किया गया। इनमें से 29,663 को वापस धकेला गया, 71 को वापस बांग्लादेश भेजा गया, 833 डिटेंशन कैंप्स में रह रहे हैं,जो निष्कासन के लिए इंतजार कर रहे हैं। 41,033 का पता नहीं चल पाया है। राज्य सरकार का दावा है कि ट्रिब्यूनल्स ने जब उनके खिलाफ आदेश दिया तो उनमें से ज्यादातर फरार हो गए।

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