सुप्रीम कोर्ट से चकमा और हाजोंग शरणार्थियों की नागरिकता सम्बन्धी फैसला बदलने को कहेगी मोदी सरकार

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ईटानगर। केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने चकमा और हजोंग शरणार्थियों को नागरिकता देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बयान देते हुए कहा है कि केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध करेगी कि वह अपने फैसले में बदलाव करे ताकि अरुणाचल प्रदेश के लोगों के अधिकार डाइल्यूट न हो।

आपको बता दें कि चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को नागरिकता देने का अरुणाचल प्रदेश में जबरदस्त विरोध हो रहा है। कई संगठन और राजनीतिक दल कह रहे हैं कि शरणार्थियों को नागरिकता देने से राज्य का सामाजिक ढांचा बिगड़ जाएगा। चकमा और हाजोंग मूलत: पूर्वी पाकिस्तान के चिटगांव हिल क्षेत्र के निवासी है।1960 में काप्तई बांध प्रोजेक्ट के कारण जब ये इलाका जलमग्न हो गया तो उन्हें मातृभूमि छोड़कर भागना पड़ा और वे अरुणाचल प्रदेश में चांगलांग डिस्ट्रिक्ट के बोरदुम्सा दीयुन व पापुम पारे जिले के कोकिला इलाके में आकर बस गए। इन शरणार्थियों की संख्या ६० हजार के लगभग बताई जाती है।

रिजिजू ने इस बात पर हैरानी जताई कि यह संदेश कैसे चला गया कि चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को नागरिकता देने का फैसला केन्द्र का है। रिजिजू ने पूछा कि 1964 से अरुणाचल प्रदेश की सरकारें चकमा और हाजोंग के अवैध प्रवेश पर नियंत्रण में क्यों अक्षम रही? बकौल रिजिजू, ये गलतियां हैं और मैं पीछे नहीं जा सकता और पूर्व की गलतियों को ठीक नहीं कर सकता लेकिन मैं इंडिजनस लोगों के अधिकारों के संरक्षण को सुनिश्चित कर सकता हूं। जब तक मैं वहां हूं तब तक इंडिजनस लोगों के अधिकारों को कम करने की अनुमति नहीं दूंगा। यह मेरी बाध्यता और कर्तव्य है।

नहारलागुन हेलिपेड पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए किरण रिजिजू ने कहा कि नागरिकता प्रदान करने का फैसला भारत सरकार का नहीं है। यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। हम माननीय सुप्रीम कोर्ट को बताने की कोशिश कर रहे हैं कि चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को अरुणाचलियों जैसे अधिकार देना हमें स्वीकार्य नहीं है इसलिए हम सुप्रीम कोर्ट से उसके आदेश में बदलाव के लिए अपील कर रहे हैं ताकि अरुणाचल प्रदेश के इंडिजनस लोगों के अधिकार सुरक्षित रहें। रिजिजू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के लोगों को इस बात की तारीफ करनी चाहिए कि पहली बार भारत सरकार इन शरणार्थियों को नागरिकता देने के मामले में प्रदेश की जनता के विचारों से सहमत है। हालाँकि इससे पहले रिजिजू ने कहा था कि चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को नागरिकता देने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के 2015 के आदेश का सम्मान किया जायेगा।

रिजिजू ने हैरानी जताई कि वे राष्ट्रीय उद्यानों सहित बड़े इलाकों पर कैसे अतिक्रमण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि चकमा और हाजोंग शरणार्थियों की संख्या बढ़कर 60 हजार हो गई है। 14 हजार 888 लोगों सहित 2 हजार 748 परिवार 1964 से 1969 के बीच चांगलांग डिस्ट्रिक्ट के बोरदुम्सा दीयुन व पापुम पारे जिले के कोकिला इलाके में बस गए थे। हम तब सरकार में नहीं थे। मैं अब अरुणाचल प्रदेश के हितों की रक्षा कर रहा हूं क्योंकि पहले ही नुकसान हो चुका है। मैं नहीं चाहता कि आगे भी नुकसान हो। बकौल रिजिजू, ”मैं बहुत स्पष्ट हूं। मैं किसी और चीज की परवाह नहीं करता। मैं अपने लोगों के बारे में सोचता हूं। मैं मानवाधिकारों और संवैधानिक नियमों का सम्मान करता हूं लेकिन मेरे लिए ये सभी तभी अर्थपूर्ण है अगर हमारे लोगों के सभी अधिकार सुरक्षित रहें।”

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