ब्रिक्स २०१७ में आतंकवाद पर घिरा पाक

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चीन के शियामेन शहर में चल रहे ब्रिक्स 2017 शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार किया गया है। ब्रिक्स देशों ने पाक में संचालित आतंकी संगठनों का साफ तौर से नाम लेते हुए आतंकवाद पर चिंता अपनी चिंता जाहिर की है।

ब्रिक्स देशों ने शिखर सम्मलेन घोषणापत्र में 16 बार आतंकी शब्द का इस्तेमाल करते हुए ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद को बढ़ावा देनेवाले देश पाकिस्तान को जमकर फटकार लगाई है।

आपको बता दें कि ब्रिक्स में यह पहली बार हुआ है जब पाकिस्तान में फलफूल रहे आतंकी सगंठनों का खुलकर नाम लिया गया है। भारत लगातार पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों का विश्व पटल पर जिक्र करता रहा है और इस बार ब्रिक्स 2017 में भी अपने घोषणापत्र में सीधे तौर पर आतंकी संगठनों पर प्रहार किया है।

इससे पूर्व रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन की अजीबो-गरीब मांग से ब्रिक्स सम्मलेन में उहापोह की स्थिति हो गयी थी। उनकी इस मंशा से भारत और चीन की टेंशन बढ़ गयी थी। दरअसल ब्रिक्स समेल्लन से पहले रूसी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स देशों को बहुराष्ट्रीय कंपनियो पर प्रतिबंध लगाने वाली नीतियों के खिलाफ खड़े होने का आग्रह किया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चाहते हैं कि ब्रिक्स (ब्राजील,रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) देश बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भरोसे ना रहकर अपने स्तर पर काम करना शुरू करें। पुतिन ने कहा कि साइबर सिक्योरिटी के लिए सब देश अपने हिसाब से सोचें। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि रूस की इस पहल का मकसद बेहतर प्रतियोगिता के लिए ब्रिक्स देशों की एकाधिकार-विरोधी एजेंसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने वाले प्रभावशाली तंत्र का निर्माण करना है।

भारत और चीन लगभग हर रोज बहुराष्ट्रीय कंपनियों से डील करती है। ऐसे में ब्रिक्स के दो मुख्य सदस्य भारत और चीन जैसे देशों को इससे आपत्ति हो सकती है।

भारत अपनी साइबर सिक्योरिटी के लिए अधिकतर पश्चिमी कंपनियों पर निर्भर है। भारत की अधिकतर आईटी कंपनियों का समझौता कई विदेशी कपंनियों के साथ है। जबकि पुतिन चाहते हैं कि ब्रिक्स देश पश्चिमी देशों के भरोसे और उनकी तकनीक के भरोसे रहने के बजाय अपने स्तर पर साइबर सिक्योरिटी पर काम करें।

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